I JUST WANT A PROMISE MY WILD CAT...

यह बात उन दिनों की हैं जब मैंने अपना बीकॉम पूरा करके बैंक के कॉम्पटीशन एग्जाम की तैयारी के लिए एक कोचिंग इंस्टिट्यूट में एडमिशन लिया ...


यह बात उन दिनों की हैं जब मैंने अपना बीकॉम पूरा करके बैंक के कॉम्पटीशन एग्जाम की तैयारी के लिए एक कोचिंग इंस्टिट्यूट में एडमिशन लिया । मैं पढ़ने में पहले से ही अच्छा था और अभी भी अपने "बैंक में नौकरी" करने के सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा हूँ। मैं अक्सर ऑटो से कोचिंग जाया करता था... लेकिन एक दिन मैं अपने दोस्त के साथ उसकी बाइक से लौट रहा था तब मेरी नजर एक ऑटो में बैठी एक लड़की पर गयी ... जिसका चेहरा तो मैं नहीं देख पाया क्योंकि उसने सफ़ेद कपड़े से अपना चेहरा ढका हुआ
था.....



लेकिन उसके पतले और गोरे गोरे से क्यूट से हाथ देखकर अच्छा सा महसूस हुआ मुझे नही पता था कि ये मेरे साथ पढ़ती हैं.. और कुछ दिन में मैं इस बात को भूल गया ।




फिर एक दिन जब वो मेरे पास वाली सीट पर बैठी थी तो मैंने उसको कुछ ध्यान से देखा तभी मुझे वो ऑटो वाली घटना का स्मरण हुआ क्योंकि उसको देखकर वही पतले पतले और गोरे गोरे क्यूट से हाथ याद आये और मैंने उसका मासूम सा चेहरा भी देख लिया था उस दिन ।





अब कन्फर्म करने क लिए क्लास खत्म होते ही मैं बाहर आकर ऑटो का इंतजार करने लगा जबकी वो इंतजार उसका था तभी वो पीछे से आई और मेरे बराबर में खड़ी होकर ऑटो का इंतजार करने लगी और हम दोनों एक ही ऑटो से घर आये और उसने ऑटो में बैठकर अपना चेहरा ढक लिया उसी सफ़ेद कपड़े से... अब मुझे यकीन हो गया था की ये वही हैं जिसको कुछ दिन पहले देखा था । उसका घर मेरे घर के रस्ते में ही पड़ता था लेकिन उस दिन मैंने उस से कुछ बात नही की , करता भी तो क्या मुझे तो उसका नाम तक नही पता था।




इस तरह वक़्त बीतता गया हम दोनों अक्सर साथ में ही एक ही ऑटो से घर आते रहे और नजरो से नजर का संपर्क भी हुआ लेकिन एक दूसरे से कभी कुछ बोल नहीं पाये।



फिर एक दिन वो आया जब हमने कोचिंग में ही अपने स्पीड टेस्ट के वक़्त एक mutual फ्रेंड के माध्यम से एक दुसरे से पढाई के बारे में बात की। रोज की तरह उस दिन भी हम साथ में ही घर आ रहे थे और मैंने उसको अपने रीजनिंग के नोट्स दिए और जब वो ऑटो से उतर कर जाने लगी तो मैने bye बोला उसने भी बड़े स्वीट से तरीके से bye बोला या यूँ कहिये उसकी आवाज सुनकर मेरे मन का रोम रोम खिल उठा इतनी प्यारी आवाज थी उसकी। नोट्स तो दे दिए थे पर नाम तो अभी तक नही पता था मुझे उसका।



अगले दिन जब वो आते वक़्त मिली तो मैंने उसको hii बोला जवाब में उसने भी एक प्यारी स्माइल के साथ रेस्पांस दिया। उसने कहा काफी अच्छे नोट्स हैं ले लेना एक दो दिन में , मेहनत दिख रही हैं उनमें.. मैंने भी थैंक्स बोला और कहा मुझे तो आपका नाम भी नही पता तो उसने बोला - "काव्या"



तभी मुझे अचानक याद आया कि ये नाम तो सिंघम मूवी में काजल अग्रवाल का था जो की मुझे बहुत प्यारा लगा था ...मैंने उसको बोला नाम तो काफी अच्छा हैं। उसने भी एक हँसी के साथ थैंक्स बोला।



अब मैं उससे और बात करना चाहता था , घर आकर मैंने फेसबुक पर उसको सर्च किया लेकिन वो मुझे नही मिली...अगले दिन मैंने उससे उसके फेसबुक अकाउंट के बारे में पूछा...उसके चेहरे के हाव भाव से लगा जैसे वो बताने नही चाहती थी...मैंने बोला क्या हुआ मुझे add नही करना ..जवाब आया - ऐसा कुछ नही हैं.. मैं ज्यादा यूज़ नही करती फेसबुक और उसने अपना यूजर अकाउंट बता दिया..उस दिन भी बात नही हो पायी फेसबुक पर.. फिर जब होनी स्टार्ट हुयी तो तब भी हमारी बाते पढाई तक ही सीमित रहती थी लेकिन ये भी था क़ि कभी



कभी मैं उसको इधर उधर की बातो में लगा ही लेता था...



धीरे धीरे बातो का सिलसिला आगे बढ़ता गया और मैं कई बार कुछ बोलने के बाद कहता था कि गलत मतलब नही समझना मेरी बातो का.... और जब यकीन हो जाये तो अपना व्हाट्सअप नंबर दे देना.. एक दिन वो बोली कि अपना व्हाट्सअप नंबर दो.. और गलत मतलब मत समझना, बस पढाई से रिलेटेड बातो के लिए ही नंबर ले रही हूँ... मैंने भी हँसकर कहा - वैसे ये मेरी लाइन हैं।



इसी बीच मेरा जन्मदिन आने वाला था.. और मैं उसके साथ वक़्त बिताना चाहता था..इसलिए मैंने उसको बोला कि जन्मदिन पर मूवी या रेस्टॉरेन्ट चलते हैं.. उसने मना किया तो मैंने कहा कि चल लेना न.. पास में ही हैं रेस्टॉरेन्ट.. तो उसने कहा कि देखेते हैं.. वैसे मूवी भी जा सकते हैं।



अब मैंने भी सोच लिया था कि जाना तो अब मूवी ही हैं।



जन्मदिन वाली रात १२ बजने से पहले ही मैंने बोला कि मूवी चलना हैं कल। मना करने लगी और गुस्सा होकर ऑफलाइन हो गयी। फिर रात को १२ बजे उसने मुझे जन्मदिन wish किया और बोली - क्या प्लान हैं कल का।
मैंने कहा मूवी जाना हैं, तो बोली ठीक हैं चलते हैं कल मूवी। और हम अच्छे दोस्त की तरह पहली बार मूवी गये।



उस दिन पहली बार मैंने उसका हाथ पकड़ा एक दोस्त की तरह..वाकई में काफी सॉफ्ट सा महसूस हुआ ।
मैंने तो मूवी ठीक से देखी भी नही.. बाते बनाता रहा बस.. फिर जब इंटरवल हुआ तो मैं कॉफ़ी लेकर आया और थोड़ी सी पीने के बाद बोला कॉफ़ी शेयर करते हैं एक दूसरे की क्योंकि हम बहुत लड़ाई करते हैं और हमने अपनी कॉफ़ी शेयर की।




उस दिन उसने काफी कुछ बताया अपने बारे में..अपनी फैमिली के बारे में। वक़्त का तो पता ही नही लगा उस दिन.. लेकिन मुझे ऐसा लग रहा था कि ये जन्मदिन मेरा अब तक का सबसे अच्छा जन्मदिन हैं..



 मैं पढ़ाई में अक्सर उस वाइल्ड कैट की हेल्प करता था , अभी भी करता हूं.. लेकिन अब वो भी सब कुछ सीख गयी हैं। वाइल्ड कैट इसलिए क्योंकि वो मेरे से बहुत लड़ाई करती थी छोटी छोटी बात पर...वैसे दोनों ही करते थे। जो भी हो लेकिन मैंने उसका नंबर अपने मोबाइल में wild cat के नाम से save करा हुआ था और एक दिन जब वो किसी बात पर लड़ाई कर रही थी तो मैंने उसको wild cat के नाम से save करे हुए उसके नंबर का स्क्रीन शॉट व्हाट्सएप्प पर भेज दिया.. वो और ज्यादा गुस्सा हो गयी तो मैंने बोला की काव्या के नाम से ही कर लिया हैं नंबर save. कुछ देर में बोली - वैसे अच्छा था नाम - WILD CAT और उस दिन से वो मेरे लिए जंगली बिल्ली हो गयी।




हम दोनों व्हाट्सएप्प पर स्टडी से रिलेटेड डिस्कसन करते थे। हमारी कोचिंग लगभग खत्म ही हो गयी बस कुछ ही क्लास बची हुयी थी ...बारिश का मौसम था.. मैंने बोला- काव्या आज नही जा रहे बारिश हो रही हैं उसने जिद् की और हम दोनों जाने लगे पढ़ने। लेकिन जाते समय मेरा लेनोवो मोबाइल ऑटो से गिर गया कही.. पता ही नही लगा की कैसे गिर गया.. और मेरी जंगली. बिल्ली को जब पता लगा की मोबाइल गिर गया हैं तो कॉल की एकदम से ..कॉल जाती रही लेकिन रिसीव नही करा किसी ने...।




काफी कोशिस के बाद भी मोबाइल नही मिला तो मैंने भी सोच लिया कि अब गया तो गया...क्या कर सकते हैं.. तभी वो sad होकर कहने लगी की ये सब मेरी वजह से हुआ हैं , मैंने ही आज आने के लिए जिद् की , अगर हम नहीं आते तो आज ऐसा नहीं होता । उस दिन पहली बार मुझे महसूस हुआ की ये रिअक्ट ही rude सा
करती लेकिन अंदरुनी मन से काफी इमोशनल हैं।



मैंने उसको समझाया की कोई बात नही मोबाइल ही तो था नया ले लेंगे और ऐसे  नही कहो ..तुमसे ज्यादा थोड़ी था मोबाइल। लेकिन कुछ देर बाद उसके मोबाइल पर मेरे नंबर से कॉल आयी.. हमने जल्दी से कॉल रिसीव की..एक अंकल बोल रहे थे ..उन्होंने कहा बेटा आपका मोबाइल गिर गया था आकर ले जाओ..और मैं जाकर ले आया..काफी अच्छे थे वो अंकल..वरना कौन आज के टाइम में कुछ वापस करता हैं.. मोबाइल वापस मिलने के बाद वो कहने लगी.. देख लो.. मैं लकी हूँ तुम्हारे लिए वरना मिलता नही मोबाइल.. मैंने भी एक हँसी के साथ हां बोला।




अब हम दोनों अच्छे दोस्त की तरह सब बात एक दूसरे से शेयर करते थे।लड़ाई भी करते थे..हँसी ,मजाक, काफी अच्छा था उन दिनों का माहौल.. एक बार तो मेरे को सपना भी आया की उसने मुझे आकर कहा आर्यन मुझे शॉपिंग जाना हैं मेरे साथ चलो..। मैंने बताया तो..काफी हँसी वो ..और कहने लगी हां..तुमको ही तो लेकर जाउंगी मैं शॉपिंग.. मुझे चिढा रही थी..लेकिन कुछ देर बात उसने स्टेटस लगाया- चीटिया कलैया..वे.. के मैनू शॉपिंग करा दे.. और हँसके बोली स्टेटस देख लो.. मुझे भी बड़ी अचछी फीलिंग आयी।



हम दोनों अब तक एक दूसरे के बारे में काफी कुछ जान गए थे..काफी ज्यादा बाते करते थे ..रात को १२ बजे तक पढ़ने के बाद थोड़ी देर व्हाट्सएप्प पर बात करके सोते थे। सब कुछ अच्छा चल रहा था..लेकिन उसके घर पर उसकी बुआ जी और दादी जी आई हुयी थी इसलिए वो काफी व्यस्त थी और मेरे से बात नहीं कर पायी थी..मुझे बुरा feel हो रहा था।मुझे लगा कि वो मेरे को इग्नोर कर रही हैं.. और फिर जब वो ऑनलाइन आयी.. मैंने बात की..काफी परेशान था मैं.. और मैंने कह दिया.."I M in LOVE" वो कुछ नही बोली..मैं जानता था की रिप्लाई नेगेटिव आ सकता हैं इसलिए मैंने ऐसा कहा और मैं जवाब के लिए भी तैयार था.. वो कुछ जवाब नही दे रही थी..मैंने कहा.." I will treat you always like a Princess "



 उसने कहा -I know Aryan, I know तुम मुझे Princess की तरह ट्रीट करोगें..



But I can't.. , I don't deserve u and मेरी फैमिली काफी नैरो माइंडेड हैं... और वो इंटरकास्ट मैरिज के लिए कभी नहीं मानेगे ... और मैं व्हाट्सएप्प बन्द कर रही हूँ.. यही ठीक होगा अब हम दोनों के लिए। इतना
कहकर उसने अपना व्हाट्सअप अकाउंट डिलीट कर दिया।



उस रात मैं ठीक से सो भी नही पाया..और शायद वो भी..क्योंकि मैं इतना तो जानता था कि वो भले हे मुझसे प्यार नही करती हो लेकिन कही न कही वो मुझे पसन्द तो करती हैं..



उस रात काफी बारिश भी हुयी..हमारी कोचिंग खत्म हो गयी थी..इसलिए मिलने का भी कोई चान्स नही था।
मैं जब सुबह उठा तो काफी बारिश हो रही थी..बाहर देख कर लगा कि ये आसमान भी मेरे मन की तरह रो रहा हैं। सुबह सुबह फीलिंग को कंट्रोल करना मेरे लिए हमेशा से ही बहुत मुश्किल रहा हैं फिर वो चाहे कोई दुःख की बात हो या फिर ख़ुशी की।



मन में भावनाओ का फव्वारा इतनी तेजी से बहने लगा की मैंने काव्या को कॉल की।



जब उसने कॉल रिसीव करके hello बोला..उसकी आवाज मे एक दर्द सा महसूस हुआ..मैंने उसको फिर बहुत आराम से समझाया कि - क्या फर्क पड़ता हैं अगर हम अलग अलग कास्ट के हैं.. कोई किसी को पसन्द या प्यार किसी की जाती देख कर थोड़ी करता हैं.. और तुम तो काफी समझदार और पढ़ी लिखी हो फिर भी ऐसी बाते कर रही हो । क्या तुम भी ये जाती धर्म में विस्वास करती हो ?



उसने कहा कि - नहीं, मैं ये सब बाते नही मानती लेकिन आर्यन सब कुछ देखना पड़ता हैं.. और मैं तुमको अच्छे से जान तो गयी हूँ लेकिन अभी थोड़ा और वक़्त चाहिए.. मैंने कहा ठीक हैं.. ले लो जितना टाइम भी लेना हैं.. और फिर 20 दिन बाद उसने "I love you too" कहा।



और बोली आर्यन मैं भी तुमको खोना नहीं चाहती लेकिन मैं अभी कोई प्रोमिस नही कर सकती फ्यूचर का। मैंने भी बोला कि कोई बात नहीं जो भी होगा देखा जायेगा लेकिन आने वाले कल के डर की वजह से हम अपना आज का वक़्त बर्बाद नहीं कर सकते।



आज हम दोनों साथ हैं.. इस उम्मीद के साथ की जो भी होगा देखा जायेगा..बाक़ी लड़ाई , झगड़ा, रूठना , मनाना तो चलता रहता हैं लेकिन दोनों में से कोई भी एक दूसरे से ज्यादा देर तक गुस्सा नहीं रह पाता।

अक्सर हम दोनों ही एक दूसरे के मन की बातो को ज्यादातर बिना कहे ही समझ जाते हैं। सब कुछ अच्छा हैं अब.. लेकिन मेरे मन में जब भी ख्याल आता हैं कि अगर हम अलग हो गए फैमिली की वजह से तो कैसे एक दूसरे के बिना रह पायेगे।


लेकिन फिर भी मन में एक विश्वास हैं कि one day my wild cat will be mine forever..

काव्या... बहुत सारा प्यार करता हूँ मैं आपसे..और आपके बिना..लाइफ के बारे में सोचने से भी मेरी रूह काँप जाती हैं..


मैं बस एक प्रोमिस चाहता हूँ..कि फ्यूचर में जो भी होगा..साथ में मिलकर
देख लेंगे न दोनो...I will not back out just want u and I will treat u always like a Princess.
Love uh..mine जंगली बिल्ली।




Writter- NITIN YADAV

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