टर्निंग पॉइंट

बदला कुछ ज्यादा नहीं बस उसने थोड़ी चुप्पी सी साध ली है , सही गलत के तानों बानो से दुर अपनी दुनिया ज्यादा अच्छी लगती है । पुरानी यादों मे...


बदला कुछ ज्यादा नहीं बस उसने थोड़ी चुप्पी सी साध ली है , सही गलत के तानों बानो से दुर अपनी दुनिया ज्यादा अच्छी लगती है । पुरानी यादों में डूबने के पागलपन को अपनी उपलब्धियां बताता है और इनमे खोये रहने को अपना जूनून ।


मेट्रो से लेकर पहाड़ और कॉलेज की सारी तस्वीरेँ लाइव दिखती हैं उसको ... ऐसा बोलता है । कलयुग के ज़माने में गम को एक नशा साबित कर देता है अपने तर्कों से .. उसके तर्कों से वो सही लगता है ।

ज़माने को नजदीक से क्या देखा एक फिलॉसफर ही बन गया , बातें उम्र से बड़ी हो गयी और तजुर्बा एक ज़माने जैसा ।

सच में ! इश्क़ उसको इंसान बना गया , वो तो कटपुतली बन चूका था ; बाहर निकला तो एक- एक रंग को समझ गया, परख गया !

वहीँ दूसरी और सुनहरा संगम तैयार है, बस सिर्फ रेप्लेसीमेंट हुई है सब कुछ वैसा ही होने को है , जैसा सोचा था ..

" मेहँदी लगा कर कान पर फ़ोन रख कर तुमसे बात जरूर करुँगी , बिलकुल मूवी की तरह.. वो एक दिन पहले की बात जानते हो कितनी खूबसूरत होती है ,दुनिया के सबसे प्यारे एहसास में से एक"

उन सब एहसासों को जीने की एक रुपरेखा दो साल पहले तैयार हो गयी थी ,किसी और के साथ ; बस अब अंतिम रूप देने की तैयारी बाकी है .... सिर्फ कुछ दिनों में ।

पर वो एक चुप्पी के साथ ,अपनी अलग दुनियां में गिने चुनो के साथ, हँसते मुस्कराते दिख जायेगा , 

बस गम को कोने में कही सहेज कर बुर्कानशी बना दिया करता है !!

उधर लाल जोड़े और हल्दी की तैयारी है ; ..बस जिंदगी के इस बड़े झटके को और झेल लेगा तो आंसुओ के बाद की हँसी बड़ी खिलखिलाहट भरी होगी !

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